राजस्थान के शिक्षा विभाग में कार्यरत तृतीय श्रेणी शिक्षकों के साथ टॉर्चर का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है राज्य सरकार ने 5 जुलाई तक तबादलों से रोक हटाई है, लेकिन इस बार भी इन शिक्षकों को राहत नहीं मिली है। पिछले 6 सालों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे ये शिक्षक अब तबादलों के लिए भी तरस रहे हैं, जिससे प्रदेश के करीब 1.22 लाख शिक्षक खुद को व्यवस्था की दो पाटों के बीच पिसता महसूस कर रहे हैं
तृतीय श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति का मामला बीते 6 वर्षों से कानूनी पचड़ों में उलझा है अतिरिक्त विषय से स्नातक डिग्री की वैधता को लेकर चल रहे न्यायिक विवाद के कारण लगभग 30 हजार शिक्षकों की पदोन्नति रुकी हुई है। शिक्षक संघ रेसटा का आरोप है कि सरकार की ढिलाई के कारण मामला कोर्ट में लंबित है प्रदेश के करीब 1 लाख शिक्षक तबादलों की बाट जोह रहे हैं। तृतीय श्रेणी शिक्षकों के अंतिम बार तबादले 2018 में हुए थे इसके बाद अगस्त 2021 में करीब 85,000 शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन तो लिए गए, लेकिन आज 4 साल 10 माह बाद भी उन आवेदनों का कोई नतीजा नहीं निकला
कई शिक्षक तो ऐसे हैं जो दूरदराज के प्रतिबंधित जिलों में 15 साल से पोस्टेड हैं और अपनी घर वापसी का इंतजार कर रहे हैं तृतीय श्रेणी शिक्षक कक्षा 9 से 12वीं तक पढ़ाने से लेकर विभागीय कार्यों तक में योगदान देते हैं सरकार का न पदोन्नति करना और न ही तबादले देना उचित नहीं है। हम मांग करते हैं कि तबादलों में इन्हें शामिल किया जाए 2024 में 10 से 22 फरवरी तक तबादले खुले। 2025 में 1 से 15 जनवरी और फिर 8 मई से 30 जून तक विशेष छूट दी गई। 2026 के 19 जून को तबादलों से रोक हटी, लेकिन इसमें भी तृतीय श्रेणी शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों को बाहर रखा गया
