पेयजल संकट से राहत की मिसाल बना ग्राम पापड़ी

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राजस्थान सरकार एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की पहल से ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत

कोटपूतली-बहरोड़, 13 मई। विधानसभा क्षेत्र विराटनगर के ग्राम पापड़ी में वर्षों से बनी हुई पेयजल समस्या अब दूर हो चुकी है। राजस्थान सरकार की जनकल्याणकारी सोच, मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2025-26 तथा जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के प्रभावी प्रयासों से गांव में नई पेयजल व्यवस्था स्थापित होने के बाद ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली एवं पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्ध होने से ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं।

ग्राम पापड़ी में पूर्व में पेयजल व्यवस्था के लिए गांव से लगभग 2 किलोमीटर दूर स्थित एक नलकूप संचालित था। विगत वर्षों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने एवं लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण उक्त नलकूप पूर्णतः सूख गया था। इसके चलते गांव में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो गया था। ग्रामीणों को मजबूरी में निजी खर्च पर पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे थे, जिससे आर्थिक भार भी बढ़ रहा था।

ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2025-26 के अंतर्गत ग्राम पापड़ी में शेर जी के मंदिर के पास एक नए नलकूप का निर्माण करवाया गया। जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए नए नलकूप को कमीशनिंग कर नई पाइपलाइन डालकर पेयजल आपूर्ति प्रारंभ कर दी गई।

नए नलकूप में पर्याप्त जल उपलब्ध होने से अब ग्रामवासियों को नियमित एवं पर्याप्त मात्रा में पेयजल मिल रहा है। इससे न केवल ग्रामीणों की दैनिक जीवन की कठिनाइयाँ कम हुई हैं, बल्कि उन्हें आर्थिक राहत भी प्राप्त हुई है।

राजस्थान सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल पहुंचाना है। इसी लक्ष्य को लेकर जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग द्वारा जल स्रोतों के सुदृढ़ीकरण, नई पाइपलाइन बिछाने, नलकूप निर्माण तथा जल जीवन मिशन सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गांव-गांव तक पेयजल पहुंचाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। राज्य सरकार विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है।

ग्राम पापड़ी के ग्रामीणों ने पेयजल समस्या के समाधान पर राजस्थान सरकार एवं जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नई व्यवस्था से गांव में लंबे समय बाद राहत का वातावरण बना है और अब उन्हें पेयजल के लिए परेशान नहीं होना पड़ रहा है।

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