कोटपूतली: जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग के पनियाला मोड़ स्थित दिल्ली पब्लिक वर्ल्ड स्कूल में शनिवार को ‘मदर्स डे’ का भव्यता और भावुकता के साथ आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महिला अभिभावकों को स्कूल के मेन गेट से स-सम्मान बैंड बाजे के साथ एवं तिलक लगाकर विद्यालय परिसर तक लाने के साथ हुई। अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसुज्जित विद्यालय के प्री प्राइमरी विंग परिसर में जहाँ स्कूली बच्चों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से माँ की महिमा का बखान किया। वही स्कूल प्रशासन द्वारा महिला अभिभावकों के लिए विशेष मनोरंजन व रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। जिसमें स्टोरी टेलिंग, पेंटिंग, स्विमिंग, डांस, स्पोर्ट्स, गायन सहित अनेक प्रकार की प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही।

समारोह का सबसे भावुक क्षण वह था जब विद्यार्थियों ने स्वरचित और सुप्रसिद्ध गीत “किस्मत वाले वो होते हैं जिनकी माँ होती है…” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। बच्चों की मासूम आवाज और गीतों के बोल सुनकर वहां मौजूद हर अभिभावक की आँखें नम हो गईं। बच्चों एवं अभिभावकों ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया का पहला शब्द और जीवन की पहली गुरु ‘माँ’ ही होती है, जो हमें इस संसार को समझने और चुनौतियों से लड़ने के काबिल बनाती है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला अभिभावकों ने आत्मविश्वास का परिचय देते हुए कलात्मक कौशल के माध्यम से मातृ-शक्ति के विभिन्न रंगों को भी उकेरा।

माँ केवल शब्द नहीं, पूरा ब्रह्मांड है”: मित्तल
स्कूल निदेशक आनंद मित्तल ने अत्यंत भावुक शब्दों में कहा कि, “संसार में ‘माँ’ शब्द से बढ़कर ना कोई मंत्र है और ना ही कोई तीर्थ। एक बच्चा जब असफल होता है तो पूरी दुनिया उसका साथ छोड़ सकती है, लेकिन माँ तब भी उसे आगे बढ़ने का हौसला देती है।” उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि अपने माता-पिता के प्रति सेवा भाव रखना है। निदेशक ने अभिभावकों को आश्वस्त किया कि विद्यालय केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर अपनी संस्कृति और ‘मातृ-देवो भव’ के संस्कारों को भी सींच रहा है।

संस्कारों की पाठशाला है माँ: प्रधानाचार्य
प्रधानाचार्या शिल्पा सिंह ने शैक्षणिक उपलब्धियों को साझा करते हुए माँ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “माँ प्रकृति की तरह निःस्वार्थ भाव से परिवार का पालन पोषण करती है। वह ईश्वर का वह रूप है जिसकी जगह संसार में कोई और नहीं ले सकता।” उन्होंने विद्यार्थियों को संकल्प दिलाया कि वे न केवल माँ का सम्मान करें, बल्कि उनके हर दुख-सुख में ढाल बनकर खड़े रहें। कार्यक्रम के अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता रहीं माताओं को स्कूल परिवार की ओर से सम्मानित किया गया। इस दौरान स्कूल का वातावरण उत्सव और ममता के अनूठे संगम जैसा प्रतीत हो रहा था। इस मौके पर वाइस प्रिंसिपल मनीष सामदिया, मनजीत चौधरी सहित बड़ी संख्या में बच्चे एवं अभिभावक उपस्थित थे।
