कोटपुतली/पनियाला नगर परिषद क्षेत्र में शामिल किए गए गांवों की हालत अब बद से बदतर होती जा रही है। विशेष रूप से कालूहेड़ा और पनियाला गांव के निवासी इन दिनों प्रशासन की बेरुखी के कारण नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

सड़कों पर समंदर, घरों में बीमारी
गांव के मुख्य रास्तों और रिहाइशी बस्तियों में पिछले काफी समय से गंदा पानी जमा है। निकासी की व्यवस्था ठप होने के कारण नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है। ठहरे हुए पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। घर-घर में मलेरिया, डेंगू और चर्म रोगों (Skin diseases) के मरीज सामने आ रहे हैं। राहगीरों और स्कूली बच्चों को गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।

कागजी साबित हो रहे नगर परिषद के दावे
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि जब से इन गांवों को नगर परिषद के दायरे में लिया गया है, तब से सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। परिषद द्वारा विकास के बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। नालियों की सफाई न होना ही इस जलभराव का मुख्य कारण है।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जल निकासी का स्थायी समाधान नहीं किया गया और व्यापक सफाई अभियान नहीं चलाया गया, तो वे जिला मुख्यालय पर उग्र प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान शीशराम, मेघराज हवलदार, धर्मपाल कसाना, विक्रम रावत, जेल सिंह रावत, कमल गुर्जर, शीशराम गुर्जर, छगाराम गुर्जर, जाबरमल, सिंबू सरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे और अपना रोष प्रकट किया।
