तीन साल बाद भी नहीं बदली तस्वीर! जिला बना, लेकिन कोटपूतली आज भी बस स्टैंड को तरस रहा

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कोटपूतली-बहरोड़ को जिला बने करीब तीन साल होने जा रहे हैं, लेकिन विकास के दावों की हकीकत आज भी सड़कों पर साफ दिखाई दे रही है। जिले का दर्जा मिलने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि क्षेत्र में सुविधाओं का विस्तार होगा, लेकिन हालात ऐसे हैं कि आज तक कोटपूतली को एक व्यवस्थित बस स्टैंड तक नसीब नहीं हो पाया।जयपुर ग्रामीण के सबसे बड़े रोडवेज डिपो में शामिल होने के बावजूद यहां बसों के ठहराव के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। रोजाना हजारों यात्री सड़क किनारे बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं। तेज धूप हो या बारिश, यात्रियों के लिए ना बैठने की व्यवस्था है और ना ही किसी प्रकार की मूलभूत सुविधा। बसें बीच सड़क पर रुकती हैं, जिससे पूरे शहर में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।

हैरानी की बात यह है कि जिला बनने के बाद भी यहां ना टिकट काउंटर बना और ना ही यात्रियों के लिए शेड, पेयजल या शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि हर चुनाव में विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन धरातल पर तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है।

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द बस स्टैंड निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आमजन को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिला बनने के बाद भी यदि लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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