30% एथेनॉल ब्लेंडिंग के संभावित साइड इफेक्ट्स:
1. गाड़ियों पर असर
- पुरानी गाड़ियां: 2010 से पहले की ज्यादातर गाड़ियां E10 के लिए बनी थीं। E30 से उनके फ्यूल पाइप, रबर सील, प्लास्टिक पार्ट्स जल्दी खराब हो सकते हैं। एथेनॉल रबर को सुखा देता है।
- माइलेज में गिरावट: एथेनॉल में पेट्रोल से 30-35% कम एनर्जी होती है। E30 से माइलेज 4-6% तक गिर सकता है E20 के मुकाबले।
- कोल्ड स्टार्ट समस्या: सर्दियों में गाड़ी स्टार्ट होने में दिक्कत, क्योंकि एथेनॉल ठंड में आसानी से नहीं जलता।
- इंजन में पानी: एथेनॉल नमी सोखता है। टैंक में पानी जमा होकर जंग लग सकता है, खासकर अगर गाड़ी हफ्तों खड़ी रहे।
2. इंजन की परफॉर्मेंस
- पावर कम होना: हाई एथेनॉल से कुछ गाड़ियों में पिकअप थोड़ा कम महसूस हो सकता है।
- BS3/BS4 गाड़ियां: इन्हें E30 के लिए डिजाइन नहीं किया गया। लंबे समय में इंजन लाइफ पर असर पड़ सकता है।
3. अन्य समस्याएं
- फ्यूल सिस्टम की सफाई: एथेनॉल पुरानी गंदगी को घोल देता है। शुरू में फ्यूल फिल्टर जल्दी चोक हो सकता है।
- मेंटेनेंस खर्च बढ़ना: बार-बार फिल्टर बदलना, सील बदलना पड़ सकता है।
- 2-स्ट्रोक गाड़ियां: स्कूटर, बाइक जैसे पुराने 2-स्ट्रोक इंजन में दिक्कत ज्यादा होगी।
