थैलियों समेत कचरा खुले में डालकर गोवंश के लिए बना जहर
कचरा रिसोर्ट रिकवरी सेंटर के अंदर न डालकर बिना तारबंदी के बाहर डाला गया
नीमकाथाना – स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों की लागत से बना रिसोर्स रिकवरी सेंटर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। देखरेख के अभाव में यह केंद्र अब शराबियों का अड्डा बन चुका है।

स्थिति यह है कि कचरा सेंटर के अंदर न डालकर बिना तारबंदी वाले खुले मैदान में ट्रैक्टर ट्रोलिया भर- भर कर फेंका जा रहा है। पॉलिथीन, थैलियों समेत सड़ा-गला कचरा चारों तरफ बिखरा पड़ा है। आवारा गोवंश भूख मिटाने के लिए यह कचरा खा रहे है, जो उनके लिए जहर साबित हो रहा है। कई गायों के बीमार होने की सूचना भी मिल रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम होते ही असामाजिक तत्व यहां शराब पीने के लिए जुट जाते हैं। टूटी बोतलें, डिस्पोजल और गंदगी से पूरा इलाका दूषित हो रहा है।कचरे की बदबू के कारण आसपास से निकलना भी मुश्किल है।

पाटन में डाबला रोड पर कचरे के निस्तारण के लिए यह सेंटर बनाया था, लेकिन तारबंदी न होने से व्यवस्थाओं का मकसद फेल हो रहा है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सेंटर की चारदीवारी करवाकर कचरा अंदर डलवाया जाए और यहां बैठने वाले शराबियों पर कार्रवाई हो। समय रहते ध्यान नहीं दिया तो स्वच्छता अभियान को चूना लगता रहेगा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बना रिसोर्स रिकवरी सेंटर में 9 लाख 9 हजार 422 रुपए स्वीकृत हुई थी। रिसोर्स रिकवरी सेंटर के अंदर अलग-अलग ब्लॉक बने हुए हैं लेकिन किसी भी ब्लॉक पर कोई संकेत नहीं है कि गीला कचरा, सूखा कचरा व प्लास्टिक थैलियां कौन से ब्लॉक में डालना है। ऐसी गौर लापरवाही के कारण गोवंश प्लास्टिक की थैलियों के साथ सड़ा- गला कचरा खाकर भूख मिटा रही हैं। कचरे के जगह-जगह काफी ढ़ेर लगे हुए हैं।
