108 कुंडीय महायज्ञ बना सनातन आस्था का विराट उत्सव
विराटनगर।कभी तपती धूप… कभी उमड़ती भीड़… और हर ओर गूंजते “जय श्रीराम” के जयकारे।
बजरंगपुरा स्थित श्री झीड़ा का बालाजी धाम इन दिनों सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सनातन आस्था का जीवंत प्रतीक बन चुका है। यहां आयोजित 108 कुंडीय श्री राम मारुति महायज्ञ में श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा क्षेत्र भक्ति, संस्कृति और सेवा के रंग में रंग गया।महामंडलेश्वर महंत रामदास जी महाराज एवं पुजारी सावरमल व्यास के सानिध्य में चल रहे इस विराट महायज्ञ में नौ दिनों के भीतर हवन कुंडों में 54 लाख आहुतियां पूर्ण हुईं। वैदिक मंत्रोच्चार, अखंड हवन, भजन-कीर्तन और रामनाम की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
प सोहनलाल शर्मा ने बताया कि दूर-दराज गांवों और शहरों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने हवन में आहुति अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। महिलाओं ने भजन-कीर्तन में बढ़-चढ़कर भाग लिया, तो युवा सेवा कार्यों में दिन-रात जुटे नजर आए। पंगत प्रसादी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भोजन ग्रहण किया।यज्ञाचार्य डॉ.कृष्ण कुमार शर्मा, यज्ञ ब्रह्मा गोपाल जोशी एवं पंडित अनिल शर्मा ने बताया कि महायज्ञ लगातार क्षेत्र में धार्मिक चेतना का केंद्र बनता जा रहा है। कथा वाचक रणवीर शेखावाटी ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंग सुनाते हुए धर्म, संस्कार और सनातन संस्कृति का संदेश दिया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा।
शुक्रवार को पूर्णाहुति कार्यक्रम में त्रिवेणी धाम के रामरिछपाल देवाचार्य जी महाराज, काला कोट धाम के महंत बाहुबल देवाचार्य महाराज, ओंकार दास जी महाराज बागावास अहिरान तथा लक्ष्मण दास जी महाराज नरसिंह धाम जयसिंहपुरा सहित कई संत-महात्मा उपस्थित रहे।
काला कोटा धाम के महंत बाहुबल देवाचार्य ने कहा कि इस प्रकार के यज्ञ केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते, बल्कि इनसे प्रकृति शुद्ध होती है और आसपास फैली नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। उन्होंने कहा कि यज्ञ सनातन धर्म की सांस्कृतिक व्यवस्था का आधार हैं।
महायज्ञ में बजरंग युवा उत्थान समिति बजरंगपुरा, यूथ ऑफ इंडिया सेवा समिति आंतेला, हीरामल समिति, देव सेवा समिति नीमली, शिव सेवा समिति झीड़ागढ़ सहित स्थानीय कार्यकर्ताओं और निजी व राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सेवा कार्यों में अहम भूमिका निभाई।लोक कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अब बजरंगपुरा का यह महायज्ञ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का विराट उत्सव बन चुका है।
मौसम की चुनौतियों के बीच अटूट रही श्रद्धा
महाराज रामदास व सावरमल व्यास ने बताया कि इस 9 दिनों के अनुष्ठान के दौरान मौसम ने कई करवटें बदलीं। इस दौरान तेज आंधियां और बवंडर भी आए, लेकिन यज्ञ स्थल और अन्नपूर्णा भंडार (भोजन प्रसादी क्षेत्र) को तनिक भी नुकसान नहीं पहुँचा। उन्होंने इसे चमत्कार और ईश्वर की साक्षात उपस्थिति का संकेत बताते हुए कहा कि जहाँ अन्न और श्रद्धा का निस्वार्थ संगम होता है, वहाँ कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।
54 लाख आहुतियों का बना कीर्तिमान
यज्ञ की आहुतियों का विवरण साझा करते हुए महाराज रामदास ने बताया कि: यज्ञ का अंतिम उद्देश्य 1 करोड़ (पूर्ण कोटि) आहुतियां प्रदान करना है। इस अनुष्ठान में कुल 54 लाख आहुतियां सफलतापूर्वक दी जा चुकी हैं, जिससे ‘अर्धकोटि’का बड़ा लक्ष्य हासिल हो चुका है।
महाराज जी ने विश्वास जताया कि भक्तों के सहयोग से आने वाले समय में ‘पूर्ण कोटि’ (1 करोड़ आहुति) के संकल्प को भी अनिवार्य रूप से पूरा किया जाएगा।
युवाओं और कार्यकर्ताओं का आभार
महाराज जी ने क्षेत्र के युवा वर्ग और कार्यकर्ताओं की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि युवा साथियों ने दिन-रात, बिना थके और पूरी मर्यादा में रहकर दूर-दूर से आए भक्तों की सेवा की।महायज्ञ के समापन के बाद अब विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हज़ारों श्रद्धालु निरंतर प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र का माहौल इस समय भक्तिमय और राममय’बना हुआ है।
