नीमराना। शुद्ध एवं सुरक्षित भोजन के अधिकार और खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए एडवोकेट जयंत मूंड के नेतृत्व में निकाली जा रही ‘फूड रियलिटी मार्च’ पदयात्रा शुक्रवार को अपने 15वें दिन नीमराना पहुंची। बीकानेर से शुरू हुई यह पदयात्रा 700 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करते हुए नीमराना पहुंची, जहां सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय लोगों ने पदयात्रियों का स्वागत किया।
पदयात्रा का उद्देश्य केंद्र एवं राज्य सरकार के समक्ष खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से जुड़ी 12 प्रमुख मांगों को रखना है। जयंत मूंड के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान में खाद्य पदार्थों में मिलावट पर सख्त कार्रवाई, मिलावट के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें, प्रत्येक जिले में खाद्य जांच प्रयोगशाला उपलब्ध कराने सहित कई मांगें शामिल हैं।

खाद्य सुरक्षा को लेकर सरकारों के सामने रखी जा रहीं 12 मांगें
पदयात्रा के संयोजक एडवोकेट जयंत मूंड के अनुसार अभियान के दौरान सरकार के सामने खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से जुड़ी मांगें रखी जा रही हैं। इनमें मिलावट पर कठोर दंड, फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था, हर जिले में खाद्य जांच प्रयोगशाला, पैकेज्ड फूड पर हिंदी में स्पष्ट जानकारी, भ्रामक विज्ञापनों पर रोक तथा स्कूलों में पोषण शिक्षा जैसी मांगें प्रमुख हैं।
पदयात्रियों का कहना है कि आम लोगों को उनके भोजन की गुणवत्ता और उसमें मौजूद सामग्री की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। इसी उद्देश्य को लेकर पदयात्रा के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास भी किया जा रहा है।

बीकानेर से दिल्ली तक पैदल सफर
बीकानेर से शुरू हुई यह पदयात्रा राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए आगे बढ़ रही है। रतनगढ़, सीकर, जयपुर, कोटपूतली और बहरोड़ होते हुए पदयात्री नीमराना पहुंचे। लगातार 15 दिनों से पैदल चल रहे पदयात्रियों के सामने लंबा सफर और थकान भी चुनौती बनी हुई है, लेकिन खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को लेकर अभियान जारी है।
नीमराना पहुंचने पर अंकित यादव फौलादपुरिया, सोनू सरपंच,भोलू प्रतापसिंह पूरा महेश यादव, विकास यादव, अनिल यादव सहित कई स्थानीय लोगों ने पदयात्रियों का स्वागत किया। स्वागत के बाद पदयात्रा कारवां शाहजहांपुर के लिए रवाना हो गई।
अब नजर इस बात पर है कि बीकानेर से दिल्ली तक चल रही यह पदयात्रा सरकार के सामने रखी गई खाद्य सुरक्षा की 12 मांगों को किस स्तर तक पहुंचा पाती है।
