कोटपूतली-बहरोड़ जिले में 5,962 गतिविधियों के माध्यम से जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन को मिला व्यापक जनसमर्थन
कोटपूतली-बहरोड़, 03 जून। राज्य सरकार द्वारा संचालित वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत कोटपूतली-बहरोड़ जिले में जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों का व्यापक आयोजन किया जा रहा है। 25 मई से विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून तक चल रहे इस अभियान ने जिले में जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर लिया है। अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण एवं पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

जिले में अभियान के दौरान अब तक कुल 5,962 गतिविधियों का आयोजन किया जा चुका है। इन गतिविधियों में जनप्रतिनिधियों, किसानों, युवाओं, महिलाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं, धार्मिक संगठनों, उद्योग जगत तथा आमजन की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली है। जल संरक्षण को सामाजिक दायित्व एवं जनचेतना का विषय बनाते हुए अभियान को व्यापक जनसहयोग प्राप्त हो रहा है।

अभियान के अंतर्गत 577 जल स्रोतों की साफ-सफाई, 37 जल स्रोतों के मरम्मत एवं पुनर्जीवन कार्य, 363 स्थानों पर श्रमदान, 1,301 सरकारी कार्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों की सफाई तथा 53 डेयरी फार्मों की स्वच्छता गतिविधियां संचालित की गईं। इसके अतिरिक्त 237 ग्राम सभाओं, 213 आईईसी गतिविधियों, 183 कलश यात्राओं, 133 प्रभात फेरियों एवं रैलियों, 132 किसान एवं रात्रि चौपालों तथा 123 सेमिनार एवं कार्यशालाओं के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश आमजन तक पहुंचाया गया।

अभियान के दौरान 122 नवीन जल संरक्षण एवं विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया, जबकि 285 पूर्ण कार्यों का निरीक्षण एवं समीक्षा की गई। हरियालो राजस्थान अभियान की तैयारियों के तहत 523 गतिविधियां आयोजित की गईं तथा 110 स्थानों पर पौधारोपण कार्यक्रम संपन्न हुए। इसके साथ ही 387 पूजन कार्यक्रम, 189 शपथ कार्यक्रम, 54 प्रतियोगिताएं एवं 900 अन्य जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं।
जिले के गांव-गांव में वंदे गंगा प्रभात फेरियां, कलश यात्राएं, जनजागरूकता कार्यक्रम, पीपल पूजन, पौधारोपण एवं जल स्रोतों की साफ-सफाई जैसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जा रहे हैं। नदियों, तालाबों, बांधों, नहरों, बावड़ियों एवं अन्य पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए सामूहिक प्रयास किए जा रहे हैं। श्रमदान के माध्यम से जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का कार्य भी व्यापक स्तर पर चल रहा है।
अभियान के माध्यम से किसानों एवं पशुपालकों को उन्नत कृषि तकनीक, सूक्ष्म सिंचाई, फसल विविधीकरण, जल प्रबंधन एवं प्राकृतिक खेती संबंधी उपयोगी जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। किसान चौपाल, कृषि कार्यशालाओं एवं जनसंवाद कार्यक्रमों के जरिए कम पानी में अधिक उत्पादन के मॉडल को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
अभियान की एक विशेष पहल के रूप में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं एवं ग्राम पंचायतों को जिला प्रशासन द्वारा “जल गौरव सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा। इससे समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा एवं प्रेरणा का वातावरण विकसित होगा।
राज्य सरकार द्वारा आगामी पांच वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमे इस साल जिले का लक्ष्य 18 लाख पौधे लगाने का है। वंदे गंगा अभियान के साथ हरियालो राजस्थान अभियान की तैयारियां भी प्रारंभ हो चुकी हैं। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से जल एवं पर्यावरण संरक्षण के इस महाअभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा प्रत्येक परिवार द्वारा कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया है। आमजन से अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की गई है, ताकि जल संरक्षण का यह अभियान स्थायी जनआंदोलन का रूप ले सके। जिला स्तर पर मीडिया राउंड टेबल का आयोजन कर उक्त जानकारी वाटरशेड एईएन दिनेश गुर्जर द्वारा प्रदान की गई।
