मीडिया के खुलासे के बाद सीएम पोर्टल पर हुई थी शिकायत; बीसीएमओ ने हाथ खड़े कर झाड़ा पल्ला, परिवादी ने खारिज किया जवाब, मामला अब सीएमएचओ के पास पहुँचा
माँढण (कोटपूतली-बहरोड़):माँढण स्थित राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (मॉडल हॉस्पिटल) में रात 9:30 बजे ताला लटकने और इमरजेंसी सेवाएं ठप रहने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। 9 सितंबर को मीडिया द्वारा प्रमुखता से खबर प्रकाशित करने के बाद जागरूक नागरिक ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई थी। अब इस मामले में चिकित्सा विभाग (बीसीएमओ शाहजहांपुर) का जो आधिकारिक जवाब सामने आया है, उसने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

प्रशासन का चौंकाने वाला जवाब: “सिर्फ दो डॉक्टर, रात में ड्यूटी नहीं कर सकते”
खंड मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (BCMO शाहजहांपुर) ने अस्पताल प्रभारी के हवाले से रिपोर्ट दर्ज करते हुए लिखा कि:
माँढण सीएचसी में स्वीकृत पदों के आधे से भी कम चिकित्सक तैनात हैं।
तैनात डॉक्टरों में से डॉ. सुरेश चंद यादव के पास बीसीएमओ का अतिरिक्त चार्ज है और डॉ. प्रतिभा यादव मेडिकल लीव (अवकाश) पर हैं।
वर्तमान में अस्पताल सिर्फ दो डॉक्टरों के सहारे चल रहा है।
प्रशासन ने साफ शब्दों में कह दिया कि “ये दो डॉक्टर केवल दिन में ड्यूटी करते हैं, रात में ड्यूटी नहीं कर सकते”।
डॉक्टरों की नियुक्ति सरकार के स्तर पर होनी है, इसलिए इसे ‘हमारे कार्यक्षेत्र से बाहर’ बताते हुए शिकायत को बिना समाधान के ही ‘डिस्पोज़’ (निस्तारित) करने का प्रस्ताव दे दिया गया।
कागजी निस्तारण से परिवादी असंतुष्ट, सीएमएचओ को दोबारा भेजी गई शिकायत
विभाग द्वारा समस्या का समाधान निकालने के बजाय शिकायत बंद करने के रवैये पर परिवादी ने सख्त आपत्ति जताई। संपर्क पोर्टल पर सत्यापन के दौरान इस कार्रवाई को असंतोषजनक बताते हुए खारिज किया गया। परिवादी का स्पष्ट कहना है कि अस्पताल समय पर खुले, 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं शुरू हों और डॉक्टरों व स्टाफ की तैनाती की जाए। इसके बाद अब यह मामला स्वतः उच्च स्तर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), कोटपूतली-बहरोड़ को त्वरित कार्यवाही हेतु अग्रेषित कर दिया गया है।
हमारे सवाल:
मॉडल सीएचसी का बोर्ड सिर्फ दिखावे के लिए? जब अस्पताल 24 घंटे आपातकालीन सेवा देने में सक्षम ही नहीं है, तो इसे ‘मॉडल सीएचसी’ का दर्जा देकर जनता को धोखे में क्यों रखा जा रहा है?
रात को बीमार पड़ना मना है? यदि रात के समय किसी मरीज को हार्ट अटैक आए, जहरीला कीड़ा काटे या गंभीर सड़क हादसा हो जाए, तो क्या वह सुबह डॉक्टरों की ओपीडी खुलने का इंतजार करे?
उच्च स्तर पर पैरवी क्यों नहीं? स्वीकृत पदों के आधे से कम डॉक्टरों के भरोसे चल रहे अस्पताल के लिए स्थानीय जन प्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों ने अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए?
