प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत समेकित चारागाह विकास एवं फलदार पौधरोपण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
कोटपूतली-बहरोड़। राजस्थान सरकार द्वारा जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सतत ग्रामीण विकास को लेकर किए जा रहे प्रयास अब धरातल पर प्रभावी परिणाम देने लगे हैं। इसी कड़ी में पंचायत समिति विराटनगर की ग्राम पंचायत आंतेला के ग्राम नीलका में जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के अंतर्गत सात हेक्टेयर चारागाह भूमि पर समेकित चारागाह विकास कार्य एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

इस परियोजना की शुरुआत गत वर्ष चलाए गए “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के दौरान की गई थी। अभियान के तहत जल संरक्षण के साथ पर्यावरण संतुलन एवं ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में व्यापक कार्य किए गए। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए नीलका में चारागाह क्षेत्र को हरित एवं उत्पादक स्वरूप प्रदान किया गया है।
परियोजना के अंतर्गत दो हजार उन्नत एवं कलमी फलदार पौधे लगाए गए हैं, जिनमें आम, नींबू, मौसमी, लसोड़ा, आंवला, अमरूद, बेर तथा अनार शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लगभग पाँच सौ छायादार पौधों का भी रोपण किया गया है। इन पौधों के संरक्षण और दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए बूँद-बूँद सिंचाई प्रणाली तथा सोलर पंप की व्यवस्था की गई है, जिससे जल की बचत के साथ ऊर्जा संरक्षण भी सुनिश्चित हो रहा है।

चारागाह क्षेत्र को मवेशियों एवं अन्य जानवरों से सुरक्षित रखने के लिए चारों ओर तार फेंसिंग की गई है। पौधों की नियमित देखरेख के लिए चौबीस घंटे गार्ड की तैनाती की गई है, जो सिंचाई, दवाई छिड़काव एवं सुरक्षा संबंधी कार्यों का संचालन कर रहा है। गार्ड के रहने हेतु कमरे की भी व्यवस्था की गई है, जिससे परियोजना का सतत संचालन सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों के अनुसार लगाए गए कलमी एवं उन्नत किस्म के फलदार पौधे आगामी दो वर्षों में फल देना प्रारंभ कर देंगे। इससे ग्राम पंचायत की आय में वृद्धि होगी तथा इसका लेखा-जोखा उपसमिति जलग्रहण विकास अंतेला द्वारा किया जाएगा। यह मॉडल भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता एवं सामुदायिक भागीदारी का मजबूत उदाहरण बन सकता है।

परियोजना की सफलता को देखते हुए ग्राम पंचायत की मांग पर लगभग 15 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि पर 4500 और फलदार पौधे लगाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसके साथ ही क्षेत्र में मियावाकी पद्धति से 33 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे क्षेत्र में घना हरित आवरण विकसित हो सकेगा।
राजस्थान सरकार द्वारा जल एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर निरंतर नवाचार आधारित योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान, वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, अमृत सरोवर योजना, मनरेगा के अंतर्गत जल संरक्षण कार्य, कैच द रेन अभियान तथा हरित राजस्थान अभियान जैसी योजनाएं प्रदेश में जल संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
राज्य सरकार का उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में हरित विकास, जैव विविधता संरक्षण, चारागाह विकास, भू-जल स्तर में सुधार तथा किसानों एवं ग्रामीण समुदाय की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना भी है। अंतेला का यह समेकित चारागाह विकास मॉडल इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जो आने वाले समय में अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बनेगा।
जल संरक्षण, सौर ऊर्जा, आधुनिक सिंचाई तकनीक, पौध संरक्षण एवं सामुदायिक सहभागिता का यह समन्वित प्रयास ग्रामीण राजस्थान में सतत विकास की नई दिशा तय कर रहा है।
