जयपुर। नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में स्थित आमेर सागर के पास कथित अतिक्रमण को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों और नशा करने वाले लोगों ने मंदिर की आड़ में वन भूमि पर कब्जा कर रखा है। उनका कहना है कि यदि यह क्षेत्र वास्तव में वन्यजीव अभयारण्य की अधिसूचित सीमा में आता है, तो इस प्रकार का कब्जा और निर्माण गंभीर मामला है तथा इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वन्यजीव अभयारण्य का उद्देश्य वन, वन्यजीव और प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण करना है। ऐसे में यदि संरक्षित क्षेत्र में किसी प्रकार का अवैध अतिक्रमण या निर्माण हुआ है, तो यह वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कानूनों का उल्लंघन हो सकता है। लोगों ने आरोप लगाया कि मंदिर की आड़ में धीरे-धीरे स्थायी कब्जा किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की प्राकृतिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
जब इस संबंध में क्षेत्र के वन विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली गई तो उनका कहना था कि “यह वन मंत्री जी द्वारा बनवाया गया है।” हालांकि, अधिकारियों ने इस संबंध में किसी लिखित आदेश, स्वीकृति या आधिकारिक दस्तावेज की जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
इस जवाब के बाद स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि यदि निर्माण पूरी तरह वैध है, तो संबंधित विभाग को इसकी प्रशासनिक एवं कानूनी स्वीकृति सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे। वहीं यदि मामला नियमों के विपरीत है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
क्षेत्रवासियों ने राज्य सरकार, वन विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित निर्माण और कब्जा वैधानिक अनुमति के तहत है या नहीं। लोगों का कहना है कि संरक्षित वन क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
